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मसूद के भाई ने 35 फिदायीनों को भारत पर हमले की खिलाई कसम

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने भारत में नए सिरे से दहशत फैलाने की योजना बनाई है. शुक्रवार को पाकिस्तान की एक रैली में जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर के भाई ने 35 फिदायीनों को कसम खिलाई है और उन्हें भारत पर हमला करने को कहा है.

पाकिस्तान के फैसलाबाद में मौलाना मसूद अजहर के छोटे भाई रऊफ असग़र ने रैली आयोजित की. बता दें कि भारत सरकार ने पठानकोट और नगरोटा आतंकी हमले में रऊफ असगर को आरोपी बनाया है. इस रैली में रऊफ ने भारत और पीएम मोदी के खिलाफ खूब जहर उगला. सूत्रों के मुताबिक इस रैली में 35 फिदायीन हमलावरों को जम्म-कश्मीर में सुरक्षाबलों पर हमले करने की कसम दिलाई गई.

बता दें कि इससे पहले पिछले महीने पाकिस्तान के रावला कोर्ट में भी जैश ने एक बड़ी जनसभा की थी. बता दें कि यह पहला मौका है जब इस जैश के इस दस्ते में पाकिस्तानी फिदायीन हमलावरों के साथ-साथ कश्मीरी फिदायीन हमलावर भी शामिल हैं, जिन्हें भारत में सुरक्षा एजेंसियों पर आतंकवादी हमले के लिए कहा गया है.

रैली में रऊफ असगर ने पठानकोट हमले में मारे गए पाकिस्तानी आतंकियों को याद करता हुए कहा कि इन आतंकियों ने कश्मीर में

इस वक्त 5 हजार फिदायीनों की जरूरत है. रऊफ असगर ने भारत के खिलाफ नफरत उगलते हुए कहा कि मुजाहिदों को लाल किले पर कब्जा करना है. रऊफ असगर ने अपने भाषण में बाबरी मस्जिद का भी जिक्र किया है.

रऊफ असगर ने आतंकियों को रब का वास्ता दिया है और कहा है कि अगर वे रब से मिलना चाहते हैं तो उन्हें बंदूक उठानी चाहिए और जम्मू-कश्मीर में जिहाद छेड़ना चाहिए.

संविधान दिवस के मौके पर दिल्ली के विज्ञान भवन में एक कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने संविधान के लागू होने की तारीख याद करते हुए कहा कि यह गर्व की बात है कि सात दशकों में हमारा संविधान महान शक्ति के रूप में स्थापित हुआ.

उन्होंने कहा कि जब संविधान को लागू किया गया था, तो हमारे संविधान की आलोचना की गई थी. सर इवर जेनिंग्स ने इसे बहुत बड़ा और कठोर कहा था, लेकिन समय ने इस आलोचना को कमजोर साबित कर दिया. सात दशकों से हमारा संविधान महान शक्ति के रूप में बना हुआ है.

CJI बोले कि हमारा संविधान हमारा मार्गदर्शन करता है, मुश्किल के समय में भी संविधान ही रास्ता दिखाता है. हमारे हित में यही है कि हम संविधान की सलाह के अनुसार ही चलें. यह हमारे हित में है कि हम संविधान के दायरे में रहते हुए उपर्युक्त सलाह लें. यदि हम ऐसा नहीं करते हैं तो हमें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे.

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