Skip to main content

क्या दुनिया परमाणु जंग के ख़तरे की ओर बढ़ रही है?

एक ऐसा युग जब दुनिया ने पारंपरिक युद्ध की जगह एक विध्वंसकारी युद्ध के साये में जीना शुरू कर दिया.

अमरीकी सरकार के इस कदम के बाद रूस ने भी परमाणु हथियारों का विकास करना शुरू कर दिया.

इसके बाद कई सालों तक अमरीका और रूस में परमाणु हथियारों की एक ऐसी होड़ लगी रही जिसमें दोनों देश एक दूसरे को पीछे छोड़ने की कोशिश में लगे हुए थे.

इसी बीच दुनिया ने क्यूबा मिसाइल संकट भी देखा जब अमरीका और सोवियत संघ के बीच परमाणु युद्ध शुरू होने जैसी स्थिति बन गई थी.

इस दौर में हमले की चेतावनी मिलते ही आपको और आपके परिवार को तत्काल किसी जगह छिपना होता था.

लेकिन आख़िरकार सोवियत संघ और अमरीका इस तरह के संघर्ष से बचने के लिए कुछ नियम और शर्तें मानने के लिए तैयार हो गए.

इसके बाद तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रेगन और सोवियत संघ के नेता मिखाइल गोर्वाचोव ने साल 1987 में इंटरमीडिएट रेंज न्युक्लियर फोर्सेज़ ट्रीटी पर हस्ताक्षर किए.

ये एक ऐतिहासिक घटना थी क्योंकि एक लंबे अरसे तक अमरीका और रूस के बीच शीत युद्ध चलने के बाद दुनिया के ये दो सबसे शक्तिशाली देश इस मुद्दे पर एक समझौता कर पाए थे.

इस संधि ने प्रतिबंधित परमाणु हथियारों और ग़ैर-परमाणु मिसाइलों की लॉन्चिंग को रोकने की दिशा में काम किया.

अमरीका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने हाल ही में ऐलान किया है कि वह अपने देश को इस संधि से बाहर निकाल रहे हैं.

डोनल्ड ट्रंप कहते हैं, "दुर्भाग्य के साथ ये कहना पड़ रहा है कि रूस ने इस संधि का सम्मान नहीं किया है. ऐसे में हम इस संधि को तोड़ने जा रहे हैं. हम इस संधि से बाहर निकल रहे हैं."

अमरीकी सरकार के इस कदम के बाद सवाल उठता है कि क्या हमें एक परमाणु युद्ध की आशंका से डरना चाहिए या दुनिया को ऐसी संधियों की ज़रूरत है.

इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए हमें ये समझना होगा कि अमरीका और सोवियत संघ के बीच जो संधि हुई थी उसका हमारी दुनिया पर क्या असर पड़ा.

आईएनएफ़ संधि का प्रभाव?

साल 1987 में अस्तित्व में आने वाली इस संधि की वजह से मिसाइलों की एक बड़ी संख्या को नष्ट कर दिया गया जिन्हें युद्ध की स्थिति में तैनात किया जा सकता था.

इसके साथ ही इसने कई तरह के हथियारों पर प्रतिबंध लगा दिए. जमीन से लॉन्च की सकने वाली पांच सौ से पचपन सौ किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइलों को बैन कर दिया गया.

लेकिन अमरीकी सरकार का मानना है कि रूस ने इसकैंडर जैसी एक ऐसी मिसाइल बना ली है जो पांच सौ किलोमीटर से भी ज़्यादा की रेंज में हमला कर सकती है जो कि इस संधि का उल्लंघन है.

रूस का कहना है कि उसने संधि की शर्तों का उल्लंघन नहीं किया है. लेकिन अमरीका और उसके सहयोगी संगठन नेटो के सदस्य देश अपने दावे पर अडिग हैं.

अगर अमरीका और रूस के रिश्तों की बात करें तो दोनों के बीच परमाणु संघर्ष का अपना इतिहास रहा है. लेकिन अब सवाल सिर्फ रूस का ही नहीं है.

चीन इस संधि का हिस्सा नहीं है और उसने ऐसे कई हथियारों को तैनात कर रखा है.

अमरीका और उसके सहयोगी देश जापान-दक्षिण कोरिया इस वजह से असुरक्षित महसूस करते हैं.

अब अगर अमरीका इस संधि से बाहर होता है तो वह इंटरमीडिएट रेंज की जमीन से लॉन्च की जा सकने वाली नई मिसाइलें बना सकता है.

ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इससे हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए बनाई गई सभी व्यवस्थाएं चरमरा सकती हैं.

लंबी दूरी तक परमाणु हथियारों को ले जाने वाली मिसाइलों पर 'स्टार्ट' संधि के तहत प्रतिबंध लगा हुआ है.

लेकिन ये संधि भी 2021 में ख़त्म होने जा रही है.

रूस और अमरीका इस संधि को आगे बढ़ाने के लिए आपसी सहमति बना सकते हैं.

लेकिन अगर दोनों देशों के बीच अविश्वास की भावना बढ़ती गई और ये संधि भी ख़त्म हो गई तो साल 1972 के बाद पहली बार ऐसा होगा जब अमरीका और रूस के लंबी दूरी वाले परमाणु हथियारों पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं रहेगा.

Comments

Popular posts from this blog

मसूद के भाई ने 35 फिदायीनों को भारत पर हमले की खिलाई कसम

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने भारत में नए सिरे से दहशत फैलाने की योजना बनाई है. शुक्रवार को पाकिस्तान की एक रैली में जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर के भाई ने 35 फिदायीनों को कसम खिलाई है और उन्हें भारत पर हमला करने को कहा है. पाकिस्तान के फैसलाबाद में मौलाना मसूद अजहर के छोटे भाई रऊफ असग़र ने रैली आयोजित की. बता दें कि भारत सरकार ने पठानकोट और नगरोटा आतंकी हमले में रऊफ असगर को आरोपी बनाया है. इस रैली में रऊफ ने भारत और पीएम मोदी के खिलाफ खूब जहर उगला. सूत्रों के मुताबिक इस रैली में 35 फिदायीन हमलावरों को जम्म-कश्मीर में सुरक्षाबलों पर हमले करने की कसम दिलाई गई. बता दें कि इससे पहले पिछले महीने पाकिस्तान के रावला कोर्ट में भी जैश ने एक बड़ी जनसभा की थी. बता दें कि यह पहला मौका है जब इस जैश के इस दस्ते में पाकिस्तानी फिदायीन हमलावरों के साथ-साथ कश्मीरी फिदायीन हमलावर भी शामिल हैं, जिन्हें भारत में सुरक्षा एजेंसियों पर आतंकवादी हमले के लिए कहा गया है. रैली में रऊफ असगर ने पठानकोट हमले में मारे गए पाकिस्तानी आतंकियों को याद करता हुए कहा कि इन आतंकियों ने कश्मीर में इस वक्त 5 हजार फिदा...

क्राइमिया को लेकर क्यों भिड़ रहे हैं रूस और यूक्रेन

रूस और यूक्रेन के बीच उठे ताज़ा विवाद के बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ होने वाली अपनी मुलक़ात रद्द कर सकते हैं. ट्रंप ने वॉशिंगटन पोस्ट अख़बार को बताया कि वो रूसी जहाज़ों के यूक्रेनियाई नावों पर गोलियां चलाने और उन्हें ज़ब्त करने के मामले से संबंधित 'पूरी रिपोर्ट' का इंतज़ार कर रहे हैं. इसी सप्ताह दोनों देशों के नेता जी-20 सम्मेलन के दौरान बुईनोस एर्स में मुलाक़ात करने वाले हैं. अमरीका ने यूरोपीय देशों से कहा है कि वो इस मामले में यूक्रेन का समर्थन करें. अमरीकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नूआर्ट ने कहा है कि वो रूस के ख़िलाफ़ लगे प्रतिबंधों को कड़ाई से लागू किए जाने चाहिए. क्या कहा डोनल्ड ट्रंप ने? ट्रंप से वॉशिंगटन पोस्ट से कहा कि उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की टीम से जो रिपोर्ट आने वाली है वो बेहद "निर्णायक" होगी. उनका कहना है, "हो सकता है कि मैं उनसे मुलाक़ात ही ना करूं . मुझे आक्रामक रवैय्या पसंद नहीं है. मैं नहीं चाहता कि कोई आक्रामक रुख़ अपनाए." इससे पहले राष्ट्रीय सुर...