एक ऐसा युग जब दुनिया ने पारंपरिक युद्ध की जगह एक विध्वंसकारी युद्ध के साये में जीना शुरू कर दिया . अमरीकी सरकार के इस कदम के बाद रूस ने भी परमाणु हथियारों का विकास करना शुरू कर दिया . इसके बाद कई सालों तक अमरीका और रूस में परमाणु हथियारों की एक ऐसी होड़ लगी रही जिसमें दोनों देश एक दूसरे को पीछे छोड़ने की कोशिश में लगे हुए थे. इसी बीच दुनिया ने क्यूबा मिसाइल संकट भी देखा जब अमरीका और सोवियत संघ के बीच परमाणु युद्ध शुरू होने जैसी स्थिति बन गई थी. इस दौर में हमले की चेतावनी मिलते ही आपको और आपके परिवार को तत्काल किसी जगह छिपना होता था. लेकिन आख़िरकार सोवियत संघ और अमरीका इस तरह के संघर्ष से बचने के लिए कुछ नियम और शर्तें मानने के लिए तैयार हो गए. इसके बाद तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रेगन और सोवियत संघ के नेता मिखाइल गोर्वाचोव ने साल 1987 में इंटरमीडिएट रेंज न्युक्लियर फोर्सेज़ ट्रीटी पर हस्ताक्षर किए. ये एक ऐतिहासिक घटना थी क्योंकि एक लंबे अरसे तक अमरीका और रूस के बीच शीत युद्ध चलने के बाद दुनिया के ये दो सबसे शक्तिशाली देश इस मुद्दे पर एक समझौता कर पाए थे....